चक्रवात (Cyclone) सामान्य जानकारी
ज्वार–भाटा
(Tide ebb)
ज्वार–भाटा :–
सागरीय जल का सूर्य और चंद्रमा की आकर्षण शक्तियों के कारण ऊपर उठने एवं गिरने को ही जवार–भाटा(Tide ebb) कहते हैं
ज्वार–भाटा के प्रकार:–
उच्च ज्वार:–
जब सूर्य, पृथ्वी तथा चंद्रमा एक सीध में होते हैं तब उच्च ज्वार (High tide) उत्पन्न होता है
निम्न ज्वार:–
जब सूर्य, पृथ्वी तथा चंद्रमा समकोण अवस्था में होते हैं तब निम्न ज्वार (Low tide) उत्पन्न होता है
प्रत्येक स्थान (सागर में) पर 12 घंटे के बाद ज्वार–भाटा आना चाहिए किंतु प्रतिदिन लगभग 26 मिनट देर से आता है क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी के सापेक्ष गतिशील हैं।
ज्वार–भाटा के समय उत्पन्न होने वाली तरंगे ज्वारीय तरंगे कहलाती हैं।
सूर्य चंद्रमा से बड़ा है फिर भी चंद्रमा का आकर्षण शक्ति सूर्य से दुगनी होती हैं क्योंकि सूर्य चंद्रमा की तुलना में सूर्य पृथ्वी से दूर हैं।
दीर्घ ज्वार प्राय: पूर्णमासी एवं अमावस्या को ही आता है।
दीर्घ ज्वार सामान्य ज्वार 20% ऊंचा होता है
सिजगी:– सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी की एक रेखीय स्थिति है इस समय इनके सम्मिलित परिणामस्वरूप दीर्घ ज्वार अनुभव किया जाता है।
निम्न ज्वार:– जब सूर्य पृथ्वी और चंद्रमा समकोण की स्थिति में होती हैं तो चंद्रमा और सूर्य का आकर्षण बल एक दूसरे के विपरीत कार्य करता है जिसके कारण निम्न ज्वार का अनुभव किया जाता है
निम्न ज्वार (लघु ज्वार) सामान्य ज्वार से 20% नीचा होता है
ज्वार की ऊंचाई सर्वाधिक होती हैं फंडी की खाड़ी में होती है
महासागर में ज्वार भाटा की उत्पत्ति के क्या कारण हैं पृथ्वी के घूर्णन गति से
RK EDUCATION
Nice guru
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