चक्रवात (Cyclone) सामान्य जानकारी

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  चक्रवात (Cyclone) चक्रवात:– कम वायुमंडलीय दाब के चारों ओर गर्म हवाओं की तेज आंधी को चक्रवात कहते हैं दक्षिणी गोलार्ध में गर्म हवाओं को चक्रवात के रूप में जाना जाता है और यह सुई की दिशा में चलता है जबकि उत्तरी गोलार्ध में इन गर्म हवाओं को हरिकेन या टायफून कहते हैं और यह सुई की विपरीत दिशा में चलता है। चक्रवात का नामकरण:– चक्रवात का नामकरण इस प्रकार पड़ा आमतौर पर तूफानों के नाम वर्णमाला के क्रम में रखे जाते हैं जैसे इन आठ क्षेत्र देशों में में– श्रीलंका, ओमान, म्यांमार, भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, थाईलैंड, मालदीव हैं, जो चक्रवाती तूफान के आने को देखते हुए उनका नामकरण करते हैं। चक्रवात के प्रकार:– चक्रवात के मुख्य रूप से छह प्रकार है ध्रुवीय चक्रवात ध्रुवीय कम उष्णकटिबंधीय चक्रवात मैसोस्केल चक्रवात अत: उष्णकटिबंधीय चक्रवात अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवात चक्रवात से बचने के उपाय:– रोशनी के खंभों से झूलते या ढीले तारों से कड़ाई से बचें। अपने परिसर से मलबा तुरंत साफ करें। यदि आप वहां चला रहे हैं तो सावधानी पूर्वक चलाएं। चक्रवा से संबंधित कुछ प्रश्न:– संयुक्त राज्य अमेरिका में कि...

ज्वार–भाटा (Tide ebb) सामान्य जानकारी

 ज्वार–भाटा 

(Tide ebb)








ज्वार–भाटा :–

सागरीय जल का सूर्य और चंद्रमा की आकर्षण शक्तियों के कारण ऊपर उठने एवं गिरने को ही जवार–भाटा(Tide ebb) कहते हैं

ज्वार–भाटा के प्रकार:–

उच्च ज्वार:–

जब सूर्य, पृथ्वी तथा चंद्रमा एक सीध में होते हैं तब उच्च ज्वार (High tide) उत्पन्न होता है

निम्न ज्वार:–

जब सूर्य, पृथ्वी तथा चंद्रमा समकोण अवस्था में होते हैं तब निम्न ज्वार (Low tide) उत्पन्न होता है









प्रत्येक स्थान (सागर में) पर 12 घंटे के बाद ज्वार–भाटा आना चाहिए किंतु प्रतिदिन लगभग 26 मिनट देर से आता है क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी के सापेक्ष गतिशील हैं।

ज्वार–भाटा के समय उत्पन्न होने वाली तरंगे ज्वारीय तरंगे कहलाती हैं।

सूर्य चंद्रमा से बड़ा है फिर भी चंद्रमा का आकर्षण शक्ति सूर्य से दुगनी होती हैं क्योंकि सूर्य चंद्रमा की तुलना में सूर्य पृथ्वी से दूर हैं।

दीर्घ ज्वार प्राय: पूर्णमासी एवं अमावस्या को ही आता है।

दीर्घ ज्वार सामान्य ज्वार 20% ऊंचा होता है

सिजगी:– सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी की एक रेखीय स्थिति है इस समय इनके सम्मिलित परिणामस्वरूप दीर्घ ज्वार अनुभव किया जाता है।

निम्न ज्वार:– जब सूर्य पृथ्वी और चंद्रमा समकोण की स्थिति में होती हैं तो चंद्रमा और सूर्य का आकर्षण बल एक दूसरे के विपरीत कार्य करता है जिसके कारण निम्न ज्वार का अनुभव किया जाता है

निम्न ज्वार (लघु ज्वार) सामान्य ज्वार से 20% नीचा होता है

ज्वार की ऊंचाई सर्वाधिक होती हैं फंडी की खाड़ी में होती है

महासागर में ज्वार भाटा की उत्पत्ति के क्या कारण हैं पृथ्वी के घूर्णन गति से


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